6 दिसंबर 1946 में आजाद भारत का संविधान तैयार करने के लिए संविधान सभा का गठन हुआ था. 26 नवंबर 1949 को संविधान के अंतिम प्रारूप को संविधान सभा ने मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद आजाद भारत का अपना संविधान 26 जनवरी 1950 से पूरे देश में लागू हुआ, लेकिन उस समय भी ये बड़ा सवाल था कि राजभाषा के रूप में कौनसी भाषा का चयन किया जाए.
जिसके बाद काफी सोच विचार किया गया, फिर हिंदी और अंग्रेजी को नए राष्ट्र की भाषा चुना गया. संविधान सभा ने देवनागरी लिपी में लिखी हिंदी को अंग्रजों के साथ राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया था, लेकिन फिर 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी. भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343 (1) में यह वर्णित है कि “संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी.
बता दें, 1918 में हिंदी साहित्य सम्मेलन में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए पहल की थी. महात्मा गांधी ने हिंदी को जनमानस की भाषा भी बताया था.
जब हिंदी भाषा देश राजभाषा चुनी गई थी, उस समय देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि इस दिन के महत्व को देखते हुए हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाए. भारत में पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 में मनाया गया था. तब से लेकर आजतक 14 सिंतबर को हिंदी दिवस मनाया जा रहा है.
Posted By :
Varu bansal
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2021-09-14 17:36
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