छोटी दिवाली के दिन लोग यम देवता की पूजा करके घर के मेन गेट के बाहर तेल का दीया जलाते हैं। क्योंकि ऐसा करने से अकाल मृत्यु कभी नहीं आती है। मान्यता यह भी है इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले शरीर पर सरसों का तेल लगाकर स्नान करने का खास महत्व है। स्नान के बाद भगवान हरि यानी विष्णु मंदिर या कृष्ण मंदिर जाकर दर्शन करना चाहिए। ऐसा करने से भी पापों से मुक्ति मिली है साथ ही खूबसूरती बढ़ती है।
छोटी दिवाली के दिन को यम चतुर्दशी रूप चतुर्दशी या रूप चौदस से भी जाना जाता है। मान्यता है कि श्राद्घ महीने में आए हुए पितर इसी दिन चंद्रलोक वापस जाते हैं। इस दिन अमावस्या होती है जिस वजह से चांद नहीं निकलता जिससे पितर भटक सकते हैं। इस वजह से उनकी सुविधा के लिए नरक चतुर्दशी के दिन एक बड़ा सा दीपक जलाना चाहिए। यमराज और पितर देवता अमावस्या तिथि के स्वामी माने जाते हैं।
श्री कृष्ण से भी जुड़ी हुई है। श्रीमद्भागवत पुराण के मुताबिक नरकासुर नामक असुर ने अपनी शक्ति से देवी-देवताओं और मानवों को परेशान किया हुआ था। असुर ने संतों के साथ 16 हजार औरतों को बंदी भी बनाकर रखा हुआ था। उसके बढ़ते अत्याचार को देखते हुए देवता और ऋषि-मुनियों ने भगवान श्रीकृष्ण की शरण ली और बोला कि इस नरकासुर का अंत कर पृथ्वी से पाप का भार कम करें।
इसके बाद भगवान कृष्ण ने उन्हें आश्वासन दिया परंतु नरकासुर को एक स्त्री के हाथों मरने का शाप था,इसी वजह से भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को सारथी बनाया और उनकी मदद से नरकासुर का वध कर दिया। जिस दिन नरकासुर का अंत हुआ था उसी दिन से कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी थी।
Posted By :
Varu bansal
()
2021-11-03 13:14
See Author's other Published Topics
Peoples
Peoples
Comments...
Write Your Comment