श्यामली से सूरत है तेरी फिर भी मोहिनी सी मूरत है तेरी आया है उत्सव हर साल की तरह जैसा शबनम खिले हर रोज की तरह...
तेरे आने की खुशी में देवकी यशोदा राधा रानी अपना प्रेम निवेद रहे हैं.. माखन चोरी वस्त्र चोरी रणछोड़ नाम है तेरे फिर भी मोहिनी सी मूरत तेरी मुख पर माखन लपेट लपेट के बंसी की मधुर धुन सुना सुना कर .. गोपी संग तू रास रचा कर पैरों मैं बांध पैजनिया सबको सिखा गए प्रेम यहां पर...
तेरी लीला तू ही जाने माखन लिए सब खड़े हैं तेरे आगे आज तू आजा मेरे अंगने दर्शन दे जा एक नंद किशोर के
राधा संग रास रचाया मैया के हाथों तू माखन खा जाए गोपी मटकी लिए खड़ी है एक कंकड़ मार कर उसको गिरा जा
तेरी लीला तू ही जाने सब हाथ जोड़ खड़े हैं तेरे आगे आज तू आजा मेरे अंगने दर्शन दे जा एक नंद किशोर के
होठों पर तो बंसी लगाकर एक मधुर संगीत सुना जा सारी गोपियां कतार में खड़ी है एक बार आकर मुझ संग रास रचा जा...!
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